परिवहन के साधन के रूप में जहाज़ों का उपयोग सदियों से होता आ रहा है. हवाई जहाज़ों से पहले के दौर में व्यापार और वाणिज्य के लिए काफी हद तक समुद्री मार्गों का ही उपयोग किया जाता था. लेकिन समुद्री मार्गों में बहुत जोखिम हुआ करता है. कई अनिश्चितताओं की संभावना रहती हैं, जैसे खराब मौसम, टक्कर लगना, दुर्घटनाएं, और समुद्री डाकुओं द्वारा कब्ज़ा आदि. इन्हीं जोखिमों के सुरक्षा के देने के लिए मरीन इंश्योरेंस की शुरुआत हुई है, जिसे इंश्योरेंस के सबसे पुराने रूपों में से एक माना जाता है.
मरीन इंश्योरेंस क्या है?
मरीन इंश्योरेंस पॉलिसी, जल मार्ग से सामान ले जाने में हुए जोखिम को कवर करती है. यह न केवल जहाज़ों के लिए, बल्कि उस पर जा रहे कार्गो के लिए भी इंश्योरेंस कवर देती है. सामान ले जाने वाले शुरुआती स्थान से लेकर सामान पहुंचने के अंतिम स्थान के बीच हुए किसी भी नुकसान को कवर करती है
मरीन इंश्योरेंस पॉलिसी. आप चार प्रकार के मरीन इंश्योरेंस कवर ले सकते हैं -
हल एंड मशीनरी इंश्योरेंस
हल, जहाज़ या पोत के मुख्य ढांचे को कहते हैं. हल पॉलिसी जहाज़ के मुख्य ढांचे और उसको हुए किसी भी डैमेज को कवर करती है. केवल जहाज़ ही नहीं, बल्कि उस पर लगी मशीनें भी समान रूप से महत्वपूर्ण होती हैं, इसलिए हल पॉलिसी को आमतौर पर हल एंड मशीनरी पॉलिसी के रूप में पेश किया जाता है. आमतौर पर जहाज़ के मालिक यह पॉलिसी चुनते हैं.
कार्गो इंश्योरेंस
कंसाइनमेंट के मालिकों को यात्रा के दौरान कार्गो के डैमेज होने, उसके खो जाने या उसे गलत ढंग से हैंडल किए जाने का जोखिम होता है. इसलिए, फाइनेंशियल नुकसान का कारण बनने वाले ऐसे जोखिम से सुरक्षा के लिए कार्गो पॉलिसी जारी की जाती है. यह पोर्ट पर, जहाज़ पर, रेलवे ट्रैक पर, या लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान आपके कंसाइनमेंट को होने वाले डैमेज को कवर करता है. कार्गो पॉलिसी से मिलने वाला कवरेज उसके प्रीमियम की तुलना में काफी अधिक होता है.
लायबिलिटी इंश्योरेंस
यात्रा में जहाज़ और उसके कार्गो को क्रैश, टक्कर, या अन्य प्रकार के जोखिम की संभावना होती है. जहाज़ के मालिक के नियंत्रण से बाहर की घटनाओं के में लायबिलिटी मरीन इंश्योरेंस पॉलिसी, जहाज़ के मालिक को कार्गो के मालिकों द्वारा किए गए क्लेम से सुरक्षा देती है.
फ्रेट इंश्योरेंस
सामान को डैमेज होने पर नुकसान शिपिंग कंपनी को भुगतना होता है. फ्रेट इंश्योरेंस इसमें शिपिंग कंपनी के हितों की रक्षा करता है. हर प्रकार की यात्रा में सामान से जुड़े जोखिम अलग-अलग होते हैं. इसलिए अलग-अलग प्रकार के कस्टमर को अलग-अलग प्रकार के मरीन इंश्योरेंस कवरेज की ज़रूरत होती है. उपलब्ध कुछ सामान्य प्रकार के कवरेज इस प्रकार हैं -
- सामान की लोडिंग या अनलोडिंग के समय कोई भी नुकसान या डैमेज.
- जहाज़ से सामान पानी में फेंकना या गिरना.
- जहाज़ का डूबना और फंसना.
- आग के कारण नुकसान.
- प्राकृतिक आपदा.
- टक्कर, मार्ग से भटकना या दुर्घटनाएं
- टोटल लॉस कवरेज.
अधिकांश मरीन इंश्योरेंस कवरेज में कार्गो का डैमेज या नुकसान होना शामिल होता है, लेकिन कुछ प्लान में सीमापार के नागरिकों द्वारा गड़बड़ी या समुद्री डाकुओं के हमले के संबंध में कुछ लिमिटेशन होते हैं. इसलिए, आइए मरीन इंश्योरेंस कवरेज के एक्सक्लूज़न के बारे में जानते हैं-
- आपके इंश्योरेंस कवर के तहत किसी भी नियमित टूट-फूट और घिसाव को शामिल नहीं किया जाता है.
- सामान की अपर्याप्त और गलत पैकेजिंग के कारण हुआ डैमेज.
- यात्रा में देरी के कारण होने वाले खर्चों को कवर नहीं करता आपका कमर्शियल इंश्योरेंस
- नुकसान करने के इरादे से जान-बूझकर किया गया डैमेज.
- राजनीतिक अशांति, युद्ध, दंगे और इसी प्रकार की दूसरी स्थितियों के कारण होने वाले डैमेज.
इसलिए अपने कार्गो को इंश्योर करने के लिए मरीन इंश्योरेंस प्लान ज़रूर लें, क्योंकि इससे आपके बिज़नेस को फाइनेंशियल मदद मिलती है और आपको यात्रा के जोखिमों के बारे में चिंता करने की बजाए अपने बिज़नेस को बढ़ाने पर फोकस करने में मदद मिलती है. समझदार बनें और इंश्योर्ड रहें.
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